मेरे दिल से हारी दुनिया

अब्दुल करीम शाद कवितायें

मेरे दिल से हारी दुनिया

क्या करती बेचारी दुनिया


हो गई इतनी भारी दुनिया

हम ने सर से उतारी दुनिया


दुनिया हम को देख न पाई

हम ने देखी सारी दुनिया


साथ निभाना मुश्किल होगा

मुझ से मत कर यारी दुनिया!


हमको है जन्नत की ख़्वाहिश

होगी तुमको प्यारी दुनिया


हम न रहेंगे, तुम न रहोगे

रहेगी लेकिन सारी दुनिया


पत्थर सबके हाथों में है

आईना है सारी दुनिया

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